मोरवड परिसरातील सुंदर, ऐतिहासिक व धार्मिक पर्यटन स्थळांची माहिती.
अंतर: २–३ किमी
गुलाम बाबा मोरवड के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियाँ यहाँ दी गई हैं: 🌟 गुला महाराज (गुलाम बाबा) की विरासत * धर्म और सामाजिक कार्य: गुला महाराज ने मुख्य रूप से भिल्ल, भील और पावरा समुदायों के बीच काम किया। उन्होंने इन समुदायों को अंधविश्वास, शराब की लत और चोरी जैसी बुराइयों से दूर रखने के लिए 'धर्म' का मार्ग सिखाया। * सत्संग और सभाएँ: वह गाँव-गाँव जाकर सत्संग (धार्मिक सभाएँ) आयोजित करते थे, जहाँ वे लोगों को सत्य और अहिंसा का पालन करने की प्रेरणा देते थे। उनके अनुयायियों को 'धर्म-पंथ' या 'भील पंथ' के नाम से जाना जाता है। * स्वदेशी और स्वतंत्रता आंदोलन: गुलाम बाबा का समय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का भी था। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन और असहयोग आंदोलन से प्रेरणा ली। उन्होंने अपने अनुयायियों को विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और अंग्रेजी शासन को कर न देने के लिए प्रेरित किया। इस कारण वह ब्रिटिश सरकार की नज़र में एक खतरनाक विद्रोही बन गए थे। * सामाजिक सुधार: उन्होंने महिलाओं के प्रति सम्मान और शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर किसी को साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए और ईमानदारी से जीवन जीना चाहिए। 🏞️ मोरवड (रंजनपुर) * तीर्थ स्थान: मोरवड (जिसे अब रंजनपुर के नाम से भी जाना जाता है) उनके कर्मभूमि और समाधि स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। * पुण्यतिथि: उनकी पुण्यतिथि 19 जुलाई को उनके अनुयायियों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस दिन महाराष्ट्र और गुजरात से हजारों भक्त मोरवड स्थित उनके मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।